क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर

अब तो घर में भी रहना कारावास है
क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।
देख विरयानी में भी है खिचड़ी का स्वाद
क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।।
क्यों अनजाना -सा लगता है अपना शहर
क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।
बड़ी मुश्किल -सी लगती ज़िन्दगी वसर
क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।।

Comments

5 responses to “क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर”

  1. Satish Pandey

    अच्छा प्रयास

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