एकांतवास में रहकर भी
नहीं हुई तपस्या पूर्ण।
खान -पान में समय बिताया
सोया पूरम पूर्ण।।
घटा नहीं कोरोना जालिम
घट गया सीधा-पानी।
‘विनयचंद ‘कुछ ऐसा कर
जो सुखी बसे सब प्राणी।।
सुखी रहे सब प्राणी
Comments
7 responses to “सुखी रहे सब प्राणी”
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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Good
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Thank u
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Good
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Thanks
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Nyc
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