जिस नारी को समझ पातकी
पति ने पत्थर बना दिया था।
दे निज चरणन की धूल रामजी
पंचकन्याओं में सजा दिया था।।
प्रातकाल उठि सुमिरन करते
इनका जो भी नर -नारी।
उनके सारे पाप कटे और
बने मोक्ष के अधिकारी।।
पाप हारिणि माँ अहिल्या
Comments
5 responses to “पाप हारिणि माँ अहिल्या”
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Nice
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Thanks
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Nice
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वाह
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Good
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