धीरज बांधकर

धीरज बांधकर रखता हूं हर वक्त
पता नहीं किस्मत कब दे दे मात
इसलिए अपने कर्तव्य करता रहता हूं
और मुकद्दर अपने आप ही बनाता हूं।

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