तारीफ न सही

तारीफ़ न सही तो
आलोचना ही कर दिया करो,
गर हो गये हो गूंगे तो
इशारा ही कर दिया करो।

सयाने बनकर देखते हो
तुम चलन सारे जमाने का …
गर चुप ही रहना है
तो निगाहें नीची कर लिया करो।

Comments

5 responses to “तारीफ न सही”

  1. अति सुन्दर रचना

    1. धन्यवाद आपका

  2. अतिसुंदर अभिव्यक्ति

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