आज कुदरत भी शर्माया होगा,
मानव रूपी दानव जो बनाया l
विनायकी नहीं, मानवता ने दम तोड़ा l
मानवता का रूह सिहर उठा,
मानव द्वारा मानवता का चीर हरण हुआ l
मासूमों पर क्रूरता प्रमाण हुआ,
मानवता नि:शब्द…..
दोबारा निर्भया जैसी क्रूरता रची गई,
बहरुपी मानव की नींव हिलाई l
खाने में भयंकर पीड़ा परोसी,
नन्हे जान की भी नहीं सोची l
इस बर्बरता ने मानव चरित्र दर्शायी,
कुदरत सहम उठी l
मानवता नि:शब्द…..
मानवता नि:शब्द
Comments
5 responses to “मानवता नि:शब्द”
-
मार्मिक चित्रण
-

👏👏
-

nice
-

वाह
-
👏👏
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.