Rajiv Mahali's Posts

  बेटी

दुष्टों ने हिंद की बेटी को पलित किया, हिन्द का दिल सहम उठा l वर्षों पहले दुष्टों के विरोध में नारा उठा था, हिन्द ने केंडल मार्च निकाला था l हिन्द ने न्याय के लिए हूंकार भरा था, पूरा देश जाग गया था। तब जाके दुष्टों को पकड़ा था, हिन्द ने फांसी की नारा लगाया था l फिर क्या था फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया था, महीनों में फांसी सुनाया था। न्यूज में खूब डीवेट चला था, कुछ ने खुद को बड़ा चमकाया था l जिसे सुनकर आ... »

मैं हिन्दी

हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था l मेरे संस्कार ने आजादी की चिंगारी डाला था l फिर क्या था मैं इतिहास रचने निकल पड़ा था l हिंद की कड़ी बनी, शंखनाद किया आजादी का l मैंने जुल्मों सितम सहा, पर अडिग रहा l आजादी का मंत्र हिंद के जनमानस में फूंका l ऐसे मैंने आजादी का इतिहास रचा ... »

चेतावनी धरती की

हे अज्ञानी मानव,  सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार,  फिर भी तू कड़े है वार l तुमको  शुद्ध आहार दिया,  मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया  l ओजन जैसी प्रहरी दिया, उसको भी कर्म से छेद किया, तुमको खुला आसमान दिया, उसको भी प्रदूषित किया l तुमको मिट्टी की खुशबू दिया,  तुमने कचरे वाली बदबू  फैलाया , जीवन उपयोगी सारी चीजें दिया,तुमने विनाशकारी चीजें बना... »

दम तोड़ती जिंदगी

अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा रही थी, मानों अपनी कातर नजरों से बहुत कुछ कह रही थी, प्राण खोने का भय न था उसमें जरा भी, मानों किसी की तिवान उसे कचोट रही थी, कौन देगा जीवन इस संसार को ? पखेरू कहाँ  ढूंढेगा अपना बसेरा ? बटोही ढूंढेगा छाँव कहाँ ? सुत करेंगे किलोल कहाँ ? ओह !&#... »

हे भारती आशीष दे मुझको

आज आजादी की शुभ अवसर है , हे भारती नमन मेरा आपको है , आशीष दें आज आप मुझको , घर  के दुश्मनों को मिटा सकूँ , बाहरी दुश्मनों का संहार कर सकूँ , भले मेरा सीना छलनी हो जाए , फिर भी दुश्मनों के सर धड़ से अलग कर सकूँ , रक्त का हर कण तेरे चरणों में  बहा दूँ , दुश्मनों के नापाक इरादे को नाकाम कर दूँ , भले मेरा मस्तक तेरे चरणों का भेंट चढ़ जाए , फ़िर भी मेरा देह दुश्मनों के छक्के छुड़ाते रहे , भले ही आत्मा... »

प्रण

आज की दिवा बड़ी गर्व की है, इस दिवा में भीष्म प्रण लेते हैं हम, आजादी के लिए जो शहीद हुए, उनका बलिदान ब्यर्थ न जाने देगें हम , सीमा पार  तो सेना निपट लेगा, कुंडली मार जो देश में बैठा है, उनसे निपट लेते हैं हम , ‘आत्म निर्भर भारत’ को सफल बनाते हैं , इसे जिंदगी भर का मुहिम बनाते है  , ‘मेक ईन चाइना’ को  भूत बनाते हैं , सिर्फ आज नहीं भविष्य में भी दिख न पाए , ऐसा भीष्म प्रण  ल... »

अभिलाषा

मैं कब कहता हूँ फूलों की सेज मिले, मुझे तो कमल जैसी सुदृढ मन मिले l जो खिलता तो कीचड़ में है, पर दाग नहीं लगने देता दामन में l कब कहता हूँ पीड़ा रहित जीवन मिले, मुझे तो गुलाब जैसी जज़्बा मिले l जो कांटों में भी मुस्कुराते रहें, फिर भी प्यार का प्रतीक कहलाए ll मैं कब कहता हूँ कि दूसरों की सेवा मिले, मुझे तो रजनीगंधा जैसी सेवा भाव मिले l जो डाली से टूटकर कहीं और सज जाए, फिर भी खुशबू फैलाती जाए l Raj... »

कुछ नया करते

चलो कुछ नया करते हैं, लहरों के अनुकूल सभी तैरते, चलो हम लहरों के प्रतिकूल तैरते हैं , लहरों में आशियाना बनाते हैं, किसी की डूबती नैया पार लगाते हैं l चलो कुछ नया करते हैं, दुश्मनों की आँखों का सूरमा नहीं, आँखे निकाल लाते हैं, चलो दुश्मनों से  दुश्मनी निभाते, दोस्तों पे कुर्बान हो जाते हैं l चलो कुछ नया करते हैं, दूसरों का श्रेय लेना बंद करते हैं, पीठ – पीछे  तारीफ करते हैं, चलो साजिश करना बं... »

गरीबी

गरीबी एक एहसास है, इसमें एक मीठी सी दर्द है, रोज़ की दर्द में भी संतोष छिपी है, फकीरी में अमीरी का एहसास है, शायद यही गरीबी है l मुर्गे की बांग  से सुबह जग जाना, नई उलझनों में फंस जाना, उलझनों को सुलझाने की कोशिश करना, पक्षी की चहक के साथ घर वापिस आना, शायद यही गरीबी की पहचान है l गरीबी में न टूटना, जरूरतों मे भी न झुकना, ज़रूरतों को कर्म से पूरी करना, विफलताओं में ईश्वर को कोसना, शायद यही गरीबी र... »

कश्मीरियों की कहानी धारा की जुबानी

मैं संविधान की धारा हूँ, निकली पीछे के दरवाजे से थी l रोक ना पाया मुझे कोई, मेरे से विका था कोई l अहंकार से चूर घर आया,कश्मीरियों पर अपना धौंस जमाया l इतने में ना हुआ संतोष, हिंद के दुश्मनों से हाथ मिलाया l स्वयं को ताकतवर बनाया, कश्मीरियों पर हंटर चलाया l             पंडितों पर जुल्मों सितम था ढाया , रातों-रात घर से भगाया  l बहू बेटियों को उठाया था , अपना हक उस पर जताया l हिंद के दुश्मनों को ला ब... »

प्रेरणा रूपी जीवन

चलो महाज्ञानी के जीवन से प्रेरणा लेते हैं, जिनकी गाथा मन में नई प्रेरणा जगा दे, जिनकी वाणी हतोत्साह में उत्साह जगा दे , जिनकी वाणी मुर्दों में जान डाल दे, अज्ञानता से ज्ञान की मुश्किल राह में चलना सीखा दे, अपनी हर पग से भूले – भटकों को राह दिखा दे, उस महाज्ञानी के जीवन से कुछ सबक सिख लें l तुलसी दास की गाथा भी बड़ी अनूठी , पत्नी रत्नावली से प्यार ऐसी वियोग नहीं सह पाते, इससे क्रोधित पत्नी खर... »

ज्ञान का पहला मार्ग

अज्ञानता ही ज्ञान का पहला मार्ग है l अज्ञानता से हीन भाव रखना, अपने आप में मूर्खता है l अल्प ज्ञान भी ज्ञान  है, जब तक अहम का वास नहीं है l महाज्ञानी भी अज्ञानी है, जब शब्दों में अहम झलकता है l ज्ञान में जब अहम का प्रभाव हो, तो वह अज्ञानी ही कहलाता है l अज्ञानी अहम खोकर ज्ञानी बनता,अज्ञान तप कर ज्ञान बनता l शब्दों में समाहित उद्देश्य, ज्ञानी को परिभाषित करता l घिसी-पिटी ज्ञान भी ज्ञान होता है,ज्ञा... »

समय रूपी डोर

समय पतंग की डोर जैसी l मांजा बड़ी तेज है l किसकी पतंग काट जाए विश्वास नहीं l कभी राजा संग कभी रंक संग l पल में तेरा पल में मेरा हो जाए l कब खुशियों की पतंग कट जाए l कभी दर्द उड़ा ले जाए l छोटो की क्या औकात l मांजा ऎसी बड़ो- बड़ो को मात दे जाए l हरिशचंद्र को सड़क पे लाया l वाल्मीकि के हाथों रामायण रचाया l इस डोर का क्या कहना l मुझे इसी डोर से है, अपनी पतंग उड़ना l इसी डोर से है, अपनी पतंग उड़ना ll ... »

   पहचान

महानता व्यक्तित्व मे नहीं, शब्दों में होती है l पहचान लिवास से नहीं, आत्मा से होती है l बल शारीरिक शक्ति में नहीं, आत्म बल में होती है l वीरता प्रवंचना से जीती विजय में नहीं, युद्ध नीति के पालन में होती है l श्रेष्ठता किसी को झुकाने में नहीं है, बल्कि झुके को अँकवार में होती है l मर्दानगी नारी की बर्बरता में नहीं, बल्कि नारी की सम्मान में होती है वीरता असहायों को कुचलने में नहीं, बल्कि साथ खड़े हो... »

ग़लतफ़हमी

चरखे से अगर आजादी मिलता, हमें सेना की जरूरत न होता l चरखे से हिंदुस्तान चलता, हिन्द मे कोई विशेष ना होता l न हिंदू मुसलमान होता, सभी हिंदुस्तानी पूत कहलाता l न करगिल, न चीन से युद्ध होता, सही मायने मे भाई – भाई कहलाता l विश्व क्रम में पहला स्थान होता, चारो तरफ नमो: नमो:होता l वीरों की शहादत न होता, न जालियावाला कांड होता l चरखे ने साजिस रचा, हिन्द को बेवकूफ़ बनाया l पर अब ना चल पाएगा, निस्वा... »

मेरा नमन

हे वीर, नमन मेरा तुझको l वीर पुत्र , सूरवीर हो l l         आप ही प्रहरी , प्रलय भी आप हो l         अश्व जैसी तेज, सिंह की दहाड़ हो ll शांत प्रिय, रुद्र रूप  हो l जल – थल ,नभ में भी आप हो ll         आप रंग , बेरंग भी हो l         सीमा रेखा ,शत्रु की जीवन रेखा आप हो ll आप हो तो संभव , न हो तो असम्भव हो l आप ही शहीद  , आप ही अमर हो ll          जीवन रक्षक , शत्रु भक्षक भी आप हो l          कठोर आ... »

मैं (अहंकार)

मैं मन की भाव हूँ, अहंकार से लिप्त हूँ l मैं लोभ , मैं मोह माया का जाल हूँ l मैं हिंसा का रूप, मैं विनाशकारी हूँ l मैं यूं ही बदनाम हूँ, वरना मैं विश्वकर्मा हूँ ll मैं अनंत हूँ , विष भी मैं हूँ l मैं चक्रव्यूह, मैं महाभारत हूँ l मैं कौरव नाशक, रावण, मैं ही कंश हूं l मैं तो यूँ ही बदनाम हूँ, वरना श्रीकृष्ण, जटाधारी हूँ ll मैं निराकार हूँ, काली, दुर्गा भी मैं हूँ l मैं वहुरूप्या हूँ, किसी को भी हर ल... »

नारी शक्ति

मैं पुत्र उस नारी की जिनकी आंखों में पीड़ा देखी , उजागर करता हूं उन पीड़ा का……….। जनमानस से भरा जिसने धरती को , घर के कोनों में मजबूर हुई जीने को। दुर्गा, काली के रूप में पूजा जिनको  , शर्मसार किया उनको । सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज है वो , फिर भी गोद में कुचला उनको। नए – नए रिश्ते को बनाने वाली रीत है वो, हमने हर रिश्तो में नीचा दिखाया उनको। उसने हममें कोई फर्क नही... »

समर्पित

हिन्द जवान मात्र जवान नहीं, ये संकट मोचक है, दुश्मनों को धूल चटाने वाली सेना है, मिटने ओर मिटाने वाली सेना है, इन्हें घेरना लोमड़ी के वस का नहीं है, निहत्थे में शेर, अस्त्र में बब्बर शेर है l ऐसी सेना हमारी है ll मुस्किल परिस्थिति में राह बनता, अंधी को आँख दिखाता, विषम परिस्थितियों में ढलना आता, लहरों में आशियाना बनाता, विषमताओं में चट्टान की तरह अडिग रहता, पार्वत में गंगा जल की धार, समतल में मगर ... »

श्रद्धांजलि

चरखे से अगर आजादी मिलता, हमे सेना की जरूरत न होता l चरखे से हिंदुस्तान चलता, हिन्द मे कोई विशेष ना होता l न हिंदू मुसलमान होता, सभी हिंदुस्तानी पूत कहलाता l न करगिल, न चीन से युद्ध होता, सही मायने मे भाई – भाई कहलाता l विश्व क्रम में पहला स्थान होता, चारो तरफ नमो नमो होता l वीरों की शहादत न होता, न जालियावाला कांड होता l चरखे ने साजिस रचा, हिन्द को बेवकूफ़ बनायाl पर अब ना चल पाएगा, निस्वार्थ... »

मानवता नि:शब्द

आज कुदरत भी शर्माया होगा, मानव रूपी दानव जो बनाया l विनायकी नहीं, मानवता ने दम तोड़ा l मानवता का रूह सिहर उठा, मानव द्वारा मानवता का चीर हरण हुआ l मासूमों पर क्रूरता प्रमाण हुआ, मानवता नि:शब्द….. दोबारा निर्भया जैसी क्रूरता रची गई, बहरुपी मानव की नींव हिलाई l खाने में भयंकर पीड़ा परोसी, नन्हे जान की भी नहीं सोची l इस बर्बरता ने मानव चरित्र दर्शायी, कुदरत सहम उठी l मानवता नि:शब्द….. »

हिन्द की आभूषण

नैतिकता हिन्द की आभूषण है, परिचायक इसके प्रभु रामजी हैं l सीतामैया अग्नि परीक्षा दी l कैसी ये नैतिकता थी ? स्वार्थरहित पीड़ा थी l मैया में सभ्य समाज की लालसा थी l यह लीला स्वच्छल धर्म की नींव थी l ये तो नैतिकता की परीकाष्ठा थी ll नैतिकता हिन्द की आभूषण है, श्रीकृष्ण इसके परिचायक है l युद्ध में अर्जुन का मार्ग दर्शन l बहुतो के लिए अनैतिकता था l पर ये नैतिकता का बर्जस्व था l अधर्म पर विजय का मार्ग थ... »

चाँद

चाँद में दाग है सबने जाना, उसकी खूबसूरती को सबने माना, खूसूरती का रहस्य किसी ने न जाना?                  बादलों का आना चमकने से रोकना,                  दूसरे पल रोशनी को भू तक पहुंचाना,                   सेवा भाव को किसी ने न जाना l दिवा में कहीं खो जाना, एकाग्रता से शाम का इन्तजार, दृढ़ मन को किसने जाना l                    अपनी राह में चलना,                     गती को बरकरार रखना,               ... »

हठधर्मी

बापू बड़े दुविधा  में पड़ गए, लाडले ने सिंहासन का जो हट कर बैठे l एक सिंहासन दोनों मे कैसे बांटे, कलेजे के जो टुकड़े ठहरे l जमीन को धर्म में बांटे , भारती के सीने में खंजर से लकीर काटे l बापू यहां भी न रुके , महानता की लालसा मन मे थे पाले l रोते विलकते हिन्द पर एक और एहसान कर डाले , विषैले, गद्दार सांप को हिन्द के कंधे डाले l भविष्य के दंगे का एक विज बो गए  , हिन्द को नासूर जख्म दे गए l गंगा, यमुन... »

भारती

भारत माता सुनो वीरों की कहानी, अपनो  का जो हुए शिकार l कालापानी सावरकर को मिला, हृदय तोड़ने वाला दर्द मिला l सहम उठा दिल मेरा, अनूठा देश प्रेम जो देखा l मन विभोर हो उठा, इतिहास के बदले स्वरूप जो देखा l सपूतों से इतिहास ने साजिश रचा, मै कुछ ना कर पाया, कुछ न कर पाया ll सुभाष का क्या बोलूँ , मेरे लिए दरदर भटकते रहा l पराक्रम से दुश्मनों को धूल चटा‍या, आजादी का पहला तिरंगा लहराया l उसे भी अपनो का धोख... »