तन्हाई हमें रास आने लगी

महफ़िलों से डर लगने लगा,
तन्हाई हमें रास आने लगी
दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा,
दुश्मनी की बांस आने लगी
समझा था जिसे अपना हमसफ़र,
उसी ने बदल दी है अपनी डग़र
दो राहे पे हमें छोड़कर,
चल दिये वो मुंह मोड़कर
आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी
दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा दुश्मनी की बांस आने लगी

सपने मिट गए, अरमां लुट गए,
भरे बाज़ार में हम तो लुट-पिट गए
जब लुट गए तब लगी थी ख़बर,
हमीं को हमारी लगी थी नज़र
जुबां चुप थी, आंखें मग़र सब राज़ कहने लगी
दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा ……

Comments

20 responses to “तन्हाई हमें रास आने लगी”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice

    1. Geeta kumari

      Thanks ..🙏

      1. काफिया रदीफ भाव और प्रवाह का ध्यान रखें।

  2. Geeta kumari

    जी… धन्यवाद

    1. Geeta kumari

      Thank you

  3. Priya Choudhary

    👏👏👏👏👏nice

    1. Geeta kumari

      🙏धन्यवाद

  4. ठीक है वैसे

    1. Geeta kumari

      🙏

      1. वेलकम

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद

  5. Geeta kumari

    धन्यवाद🙏

  6. Satish Pandey

    bahut khoob

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद🙏

  7. Devi Kamla

    Waah waah

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया जी

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