बेटीयां

जब वो पेदा होती है तो,
हर कीसी के दिमाग में उदासी छा जाती है,
बाप के सिर का बोझ भी कहीं जाती है,
लेकिन उसी बाप के सिर का ताज बन जाती है,
अपनों के लिए हर ग़म से लड़ जाती है,
फिर भी लोग कहते हैं बेटीयां सिर्फ बेटीयां ही कहलाती है,
अपने हूनर को करने साबित उड़ाने लगी हवाई जहाज ये बेटीयां,
फिर भी हर बार क्यु कौसी जाती है ये बेटीयां।

Comments

6 responses to “बेटीयां”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    ,सुंदर

  2. Praduman Amit

    रचना अच्छी है।

  3. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

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