समर्पित

हिन्द जवान मात्र जवान नहीं,
ये संकट मोचक है,
दुश्मनों को धूल चटाने वाली सेना है,
मिटने ओर मिटाने वाली सेना है,
इन्हें घेरना लोमड़ी के वस का नहीं है,
निहत्थे में शेर, अस्त्र में बब्बर शेर है l
ऐसी सेना हमारी है ll
मुस्किल परिस्थिति में राह बनता,
अंधी को आँख दिखाता,
विषम परिस्थितियों में ढलना आता,
लहरों में आशियाना बनाता,
विषमताओं में चट्टान की तरह अडिग रहता,
पार्वत में गंगा जल की धार, समतल में मगर की चाल l
ऐसी सेना हमारी है ll
बिजली जैसी गर्जना इनकी,
शेर जैसी दहाड़ इनकी,
दुश्मनों के घर घूसके मारे,
देशहित में हंसकर शीश कटवाले,
जरूरत में दुश्मनों के शीश काट लाए,
यम से आँख मिलाए, यम से भी लाड़ जाए l
ऐसी सेना हमारी है ll

Comments

11 responses to “समर्पित”

  1. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

  2. Satish Pandey

    भावपूर्ण रचना

  3. Anita Sharma

    Kamaal👍

  4. कह रहे हैं आप

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