संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो
सब दिखावा है मेरे व्यवहार में
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो.
डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत
उत्तराखंड
मुक्तक
Comments
13 responses to “मुक्तक”
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उम्दा
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सादर धन्यवाद सर
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वेलकम
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गजब
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धन्यवाद जी
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बेहतरीन
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धन्यवाद जी
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Behtrin
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सादर धन्यवाद
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गजब
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सादर धन्यवाद
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Nice
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thanks
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