साक्षात्कार

आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता,
सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता।
गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन,
जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।।

Comments

5 responses to “साक्षात्कार”

  1. Satish Pandey

    सही बात है

  2. नहीं कहा गुंडागर्दी का कोई धर्म नहीं होता

  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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