अलविदा

घनी काली
चाँदनी रात
जैसे हो रही
तारों की बरसात
महकाती गुज़रती
ये ठंडी हवा,
नींद के आगोश में
है सारा जहाँ,
ये रात क्या
कह रही है,
क्या किसी ने
उस नज़्म को सुना,
शायद कह रही है
वो अलविदा

Comments

6 responses to “अलविदा”

  1. Satish Pandey

    अति सुन्दर

    1. Anita Sharma

      Shukriya 🙏🏼

  2. भावपक्ष और कलापक्ष दोनों 👌👌

    1. Anita Sharma

      Shukriya sir

      1. Abhishek kumar

        वेलकम

  3. घनी काली भी और चांदनी भी
    ये कैसी रात है।
    तारों की बरसात है वाह क्या बात है!!

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