…… भारत का (Independence Day)

गुलामी को आज़ादी में बदल दिया,
हम वो शख्स है अपने भारत का।
हर दिन लहू से सिंचे है देश को,
इसलिए कहलाता हूँ सपूत भारत का।।
गैरो ने लगाई थी पुरी ताक़त,
फिर भी बाल न बांका कर सका।
राहों में भी बिछाए काँटे ही काँटे,
काँटे को ही फूल समझ कर चल पड़े ,
किया नाम रौशन अपने भारत का।।
भ्रष्टाचारों के भी क्या तेवर थे,
थर्रा उठी इन्सानियत था राज हैवानो के।
फिर भी हम न घबड़ाए न रुके ,
क्योंकि लाज बचाना था अपने भारत का।।
“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा “,
यही नारा था निडर वीर सुभाष का।
भारत के हर कोने से जाग उठे थे सपूत,
तब जा के सिर उँचा हुआ अपने भारत का।।
हारे बाज़ी को जीत गए,
वे सब सिकंदर थे अपने भारत का।
वीर जवानो के लहू की भेंट चढ़ी,
तब आन बची अपने भारत का।।

Comments

4 responses to “…… भारत का (Independence Day)”

  1. नमन देश को🙏

  2. देशभक्ति की बहुत ही सुंदर रचना

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