राखी बंधन

अब के बरस भैया पीहर ना आऊं,
बांधन को राखी तोय रे
रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है,
नजर वो रखे है मोए पे
डाक से भेजी है भैया को राखी,
भतीजी से लियो बंधवाए रे
अगले बरस बैरी कोरोना का अंत होगा,
फिर बांधूंगी राखी ,तोए आए के

Comments

12 responses to “राखी बंधन”

    1. धन्यवाद💐

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद

    1. Geeta kumari

      Thank you

  1. Praduman Amit

    स्थिति व समय के अनुसार आपकी कविता तारीफ़ ए काबिल है।

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद 🙏

  2. रक्षाबंधन पर एक विवाहित बहन जी स्थिति का सुंदर वर्णन

  3. Satish Pandey

    वाह वाह

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  4. Devi Kamla

    Very nice

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