तालाब!! तू परेशान मत हो
तेरी एक दो मछलियों की
फितरत होती ही ऐसी है
कि किसी नयी मछली के आने पर
मचल उठती हैं ईर्ष्या से,
उन्हें लगता है कहीं
ताज न छीन जाए उनकी बादशाहत का
उसे घेर लेती हैं
रोक देती हैं,
नई मछली समझ जाती है
उनकी मनःस्थिति
उसके सामने असलियत का चेहरा
उजागर हो जाता है,
तालाब- मछली
Comments
8 responses to “तालाब- मछली”
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वाह
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thank you
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सत्य अभिव्यक्ति
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thanks
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बहुत खूब
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dhanyvaad ji
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nice poem
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सही कहा श्लेष अलंकार का सुंदर प्रयोग
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