वो नन्ही नन्ही आंखें मुझे निहारती रहती हैं
वो छोटे छोटे हाथों की शरारत ,
और होठों की चिल्लाहट ,
मुझे बुलाती रहती है ।
अब कितना सबर करूं? कि वो मुझे ;
कब पापा कहकर पुकारे,
मेरे अंदर की ये खुशियां मुझे जगाती रहती है!
मेरे अंदर की ये खुशियां मुझे जगाती रहती है।
अनमोल सा खजाना
Comments
12 responses to “अनमोल सा खजाना”
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खूब
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🙏🙏🙏
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nice
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Thank you 😊🙏
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Nice lines
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धन्यवाद जी
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सुन्दर
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🙏
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Nice
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🙏
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‘नन्ही नन्ही आंखें’ ‘छोटे छोटे हाथों’ जैसे सुंदर शब्द युग्मों का प्रयोग हुआ है, वात्सल्य की सुंदर फुहार है
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वात्सल्य रस का तथा पुनरुक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग
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