वफ़ा की उम्मीद

हम अपनी बेबसी पर,
बेबस रहना पसंद करते हैं।
ज़माना लाख बेवफाई करें हमसे ,
हम अब भी वफ़ा की उम्मीद करते हैं।
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Comments

7 responses to “वफ़ा की उम्मीद”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी 🙏

  1. Satish Pandey

    कवि अपनी बेबसी पर व्यथित नहीं है, उसकी संवेदना आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए आगे बढ़ रही है, बहुत खूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बिल्कुल! धन्यवाद जी 🙏

  2. Geeta kumari

    Nice lines 👌

  3. आप बहुत ही आशावादी तथा साथ ही व्यक्ति हैं आपकी या रचना आप की मनोदशा को प्रदर्शित करती है

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