हम अपनी बेबसी पर,
बेबस रहना पसंद करते हैं।
ज़माना लाख बेवफाई करें हमसे ,
हम अब भी वफ़ा की उम्मीद करते हैं।
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वफ़ा की उम्मीद
Comments
7 responses to “वफ़ा की उम्मीद”
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उम्दा
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धन्यवाद जी 🙏
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कवि अपनी बेबसी पर व्यथित नहीं है, उसकी संवेदना आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए आगे बढ़ रही है, बहुत खूब
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बिल्कुल! धन्यवाद जी 🙏
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Nice lines 👌
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वाह
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आप बहुत ही आशावादी तथा साथ ही व्यक्ति हैं आपकी या रचना आप की मनोदशा को प्रदर्शित करती है
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