दूसरे को रुलाना नहीं जिंदगी

प्यार सबसे करो,
छोड़ दो नफ़रतें,
नफरतों के लिए है नहीं जिंदगी।
जितनी भी हो सके
बाटों सबको खुशी
दूसरे को रुलाना नहीं जिंदगी।
जो भी मेहनत से पाओ
रहो उसमें खुश
हक हड़पना किसी का नहीं जिंदगी।
राह में कोई दुखिया
मिले गर कहीं
उससे नजरें चुराना नहीं जिंदगी।
प्यार सबसे करो,
छोड़ दो नफ़रतें,
नफरतों के लिए है नहीं जिंदगी।
— डॉ0 सतीश पाण्डेय

Comments

7 responses to “दूसरे को रुलाना नहीं जिंदगी”

  1. Kumar Piyush

    बहुत ही सुंदर,

    1. Satish Pandey

      आभार

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर और सटीक विचार

    1. Satish Pandey

      सादर आभार व्यक्त करता हूँ, शास्त्री जी

  3. Geeta kumari

    उत्तम विचारों से परिपूर्ण सुंदर रचना

    1. सादर धन्यवाद

  4. कवि ने इस रचना में अपने सुंदर भाव तथा कोमल भावों को व्यक्त किया है इस कारण या रचना संवेदना की दृष्टि से अति उत्तम है

Leave a Reply

New Report

Close