एक गांव में किस्मतवाली
बूढ़ी अम्मा रहती है,
चार हैं बेटे चार बहू हैं,
फिर भी भूखी रहती है।
अलगौझे में नहीं बंटा जो
एक वही सामान थी
क्योंकि किसी चाह नहीं थी
बूढ़ी मां के छांव की।
चारों बेटों को चिन्ता थी
अपनी अपनी सुविधा की,
बुढ़िया की अच्छी सलाह भी
लगती थी कांव कांव सी।
कभी किसी के साथ रही
फिर कभी किसी साथ रही
चारों के घर खपी नहीं वह
लौटी उल्टे पांव थी।
अब उसका भी चूल्हा चौका
अलग कर दिया बेटों ने
कभी खा रही कभी रो रही
वह अम्मा है गांव की।
अब पूछो भी तो क्यों कहते हैं
उसको किस्मतवाली अम्मा,
क्योंकि चार बेटों की माँ है
चार बहू दस नाती हैं।
—– डॉ0 सतीश पाण्डेय
कुछ सुधार के साथ
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