मुद्दतें हो गईं

दोस्तों से मिले मुद्दतें हो गईं,
देखे हुए चेहरे खिले, मुद्दतें हो गईं
कोरोना ने जाल बिछाया ऐसा,
बाहर ना निकल सके हम
बाहर की बहार देखे मुद्दते हो गई
कोई जल्दी से लाए इसका “टीका”,
जीवन लगने लगा है, फ़ीका फ़ीका
होली भी गई फ़ीकी ,राखी भी सूनी जाए
दीवाली तक ही काश, टीका वो आ जाए
नव वर्ष फ़िर मनाएंगे धूमधाम से,
कोई जश्न मनाए मुद्दतें हो गईं।

Comments

10 responses to “मुद्दतें हो गईं”

  1. Geeta kumari

    Thank you 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you 🙏

      1. Abhishek kumar

        वेलकम

    1. Geeta kumari

      Thank you very very mu🙏🙏

    2. Geeta kumari

      Much.. Typing mistake

  2. Piyush Joshi

    Bahut khoob

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया पीयूष जी 🙏

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