खूब प्यार बरसाते बादल
से सीखो तुम तुम भी मनुहार
खाली-मूली बोल रहे हो
करते कब हो मुझसे प्यार।
करते कब हो मुझसे प्यार।
Comments
11 responses to “करते कब हो मुझसे प्यार।”
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सुन्दर
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शास्त्री सर को सर्वश्रेष्ठ आलोचनक बनने की शुभकामनाएं एवं बधाइयां 🙏💐
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वाह आचार्य जी, आपकी वाणी का प्रेम ही आपको सर्वश्रेष्ठ आलोचक बनाता है, धन्यवाद
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जी मैं तो सावन पर थोड़ा पहले से हूँ शास्त्री जी बहुत अच्छे हैं पिता की तरह से पेश आते हैं और सब भी बहुत अच्छे हैं
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बहुत अच्छी पंक्तियाँ
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Dhanyvad
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क्या बात है 👏👏
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सादर धन्यवाद
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बधाई हो आपको
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सादर धन्यवाद जी
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बहुत सुंदर रचना
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