अपनों की भीड़ में अकेली सी,
खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी।
किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल,
सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।
जीवन की पहेली
Comments
16 responses to “जीवन की पहेली”
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वाह जी वाह, बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया 🙏
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पाना है अगर मंज़िल तो
अपना रहनुमा खुद बन
वो अक्सर भटक गए
जिन्हें सहारा मिल गया।-

बेहतरीन
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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बहुत खूब प्रज्ञा जी👌बहुत शुक्रिया🙏
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धन्यवाद
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Nice
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धन्यवाद भई जी🙏
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बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया 🙏
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ग्रेट
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Nice
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Thank you kamla ji
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Atisundar
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शुक्रिया पीयूष जी
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