जीवन की पहेली

अपनों की भीड़ में अकेली सी,
खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी।
किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल,
सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।

Comments

16 responses to “जीवन की पहेली”

  1. Satish Pandey

    वाह जी वाह, बहुत खूब

  2. Geeta kumari

    बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

  3. पाना है अगर मंज़िल तो
    अपना रहनुमा खुद बन
    वो अक्सर भटक गए
    जिन्हें सहारा मिल गया।

      1. बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

    1. बहुत खूब प्रज्ञा जी👌बहुत शुक्रिया🙏

      1. धन्यवाद

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद भई जी🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

  4. विकास कुमार

    ग्रेट

    1. Geeta kumari

      Thank you kamla ji

  5. Piyush Joshi

    Atisundar

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया पीयूष जी

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