ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है,अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।
अगर जिन्दगी मौत है तो हाँ मुझे मौत से लड़ना मंजुर है ।
मौत तो आती वीरों का जिन्दगी में एक बार है ।
लेकिन कायर तो सबदिन मरते क्षण-क्षण कई बार है ।
ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है, अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।।1।।
भौतिक पुरूष धन-दौलत, ऐश्वर्य, शोहरत के लिए ।
दिन-रात मानव जीवन यूँ पिशाच की तरह बिताते है ।
जैसे कि वो मानव होके दानव वंश के नृप हो।
मानव अब ब्रह्मचर्य समझने को तैयार नहीं ।
ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है, अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।।2।।
ब्रह्मचर्य कोई सांसारिक उपलब्धि, कोई ख्याति कोई शोहरत नहीं ।
यह नहीं कोई झूठी ऐश्वर्य और नाहीं ये सांसारिक क्षणिक आनंद है ।
ये तो परमशान्ति, महाव्रत, परमात्मा से मिलन का परम साधन है ।
ऋषि-मुनियों की जप का साधन है, योगियों का परम बल है ।
ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है, अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।।3।।
सच में जिन्दगी दुःखों का जड़ है, लेकिन भोगी इसके संग है ।
ब्रह्मचर्य के प्रताप से योगी परम सुखों के संग है, लेकिन भोगी इससे कहीं दूर है ।
सच बात है दुनिया वालों जरा सुनो तुम गैर कान खोल के कोई नहीं तेरे संग है।
ब्रह्मचर्य महाव्रत के फल ही तेरे संग है, अन्यथा सारी दुनिया दुःखों का जड़ृ है ।
ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है, अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।।4।।
कवि विकास कुमार 17:21 29/06/2020
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