पुकार रहा है

पुकार रहा है
जरूरतमंद तुम्हें
आओ मदद करो मेरी,
बेरोजगारी का समय है,
कोविड के कारण
छिन गया है रोजगार,
शहर में कमाता था दो चार
वो बंद हो गया
गाँव लौट आया,
यहाँ भी तो छोड़ा हुआ घर
टूट गया था,
जैसे तैसे छत जोड़कर
दिन काट रहा हूँ बरसात के।
मदद करो जरूरतमंद की
पुकार रहा है
जरूरतमंद तुम्हें।

Comments

10 responses to “पुकार रहा है”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    उत्तम भाव

    1. धन्यवाद शास्त्री जी

  2. Geeta kumari

    आज के परिप्रेक्ष्य का यथार्थ चित्रण

    1. सादर आभार

  3. आजकल यही है।

  4. Kumar Piyush

    nice

    1. Satish Pandey

      thanks

  5. Chandra Pandey

    Good

    1. Satish Pandey

      Thanks

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