मेरे कमरे में…

आज अचानक माँ मुस्काई
फोन उठाने के बाद
बोलीं आकर खुशखबरी है
बैठी मेरे पास
सबने पूँछा क्या खुशखबरी
ये तो हमें बताओ
उत्सुकता में दिल धड़क रहा है
और ना अब तड़पाओ
उसकी शादी तय हो गई है
निमन्त्रण आया है
उन लोगों ने हम सबको
सपरिवार बुलाया है
मैं हँस दी सबके समक्ष
रोई जाकर कमरे में
दिल टूट गया, हाँथों से सपने
बिखर गए एक पल में
आज लगा मेरे दो चेहरे हैं
एक घर में, एक कमरे में।।

Comments

16 responses to “मेरे कमरे में…”

  1. Satish Pandey

    वाह वाह, क्या बात है

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Marmik bhav

  3. Geeta kumari

    ” दिल के जज्बातों को जब जब किया बयां
    एक कविता हर बार हुई”…..बहुत सुंदर प्रज्ञा जी

    1. इतनी अच्छी समीक्षा करने के लिए धन्यवाद।

      1. Geeta kumari

        Welcome sis .

      2. Geeta kumari

        ये मेरी कविता “हृदय की वेदना “से है

      1. Geeta kumari

        Thanks n welcome

  4. Shyam Kunvar Bharti

    behad bhawapurn rachnaa

    1. हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया

  5. वाह क्या बात है।
    भावपक्ष तथा कलापक्ष मजबूत।
    Nice line….

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

  6. vivek singhal

    This comment is currently unavailable

  7. बहुत सुंदर भाव
    बेहतरीन प्रस्तुति

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