जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग,
वो भी आज, ज़माने से निकले।
जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू,
वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।
शायरी (जाने माने)
Comments
12 responses to “शायरी (जाने माने)”
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वाह वाह
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🙏🙏🙏
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बहुत खूब
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🙏🙏🙏
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वाह
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🙏🙏
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बहुत ख़ूब
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🙏🙏
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N ice
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🙏
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वाह। बहुत खूब।
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धन्यवाद
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