वफ़ा

‘हम तो समझ बैठे थे, ये काँटो की वफ़ा है,
पर शुक्र हैं कि कभी नंगे पैर न थे..’

– प्रयाग

Comments

8 responses to “वफ़ा”

  1. Praduman Amit

    Wah jee wah

    1. दिल से शुक्रिया आपका

  2. क्या कहने, वाह

    1. दिल से शुक्रिया आपका

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