ज़रिया

‘देर न लगी मेरी हकीकत के मायने बदलने में,
मैं दरिया था कभी मोहब्बत का, आज दिल्लगी का ज़रिया हूँ..’

– प्रयाग
मायने :
ज़रिया – साधन

Comments

6 responses to “ज़रिया”

  1. अतिसुन्दर, वाह वाह, क्या कहने

    1. शुक्रिया सर

    1. बहुत शुक्रिया

    1. आभार आपका

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