कोरोना

महामारी का दौर यह कैसा आया ,
वक़्त ने सबको बेबस बनाया ,

कुदरत ने इस धरती को बहुत खूबसूरत बनाया ,
पर इन्सान इस नेमत को सम्भाल ना पाया ,
तो महामारी ने आकर इसका मोल बताया ,

कुदरत ने हर साधन अपार मात्रा मे बनाया ,
पर इन्सान के लालच का अंत ना हो पाया ,
तो बीमारियों की आड़ में सबको फंसाया ,

कुदरत बार-बार करती है इशारा ,
पर इन्सान अपनी ही धुन में चलता आया ,
तो आपदाओं के रूप में आकर समझाया ,

महामारी का दौर यह कैसा आया ,
इन्सान ने ही खुद को बेबस बनाया।

Suggestions are highly appreciated.

Comments

15 responses to “कोरोना”

  1. Prayag Dharmani

    सुंदर रचना

    1. शुक्रिया जी

  2. बहुत ही सच्चे भाव, यथार्थ पर आधारित वाह

    1. शुक्रिया जी

  3. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    खूब कहा अपने

  4. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    खूब कहा आपने

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

    1. Anu Singla

      Thanks

  5. Anu Singla

    Thanks

  6. Geeta kumari

    Nice

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