9 Comments

  1. विकास जी आप लिखने में बहुत गलतियां करते हैं यकीन मानिए हम सभी गलतियां करते हैं आत्महत्या का विचार लाना भी गलत होगा क्योंकि एक कवि समाज के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत होता है इस मंच पर सभी श्रेष्ठ कवि आपकी खामियों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं आप उन्हें आलोचक ना मानकर अपना गुरु समझ सकते हैं और ना भूले की आलोचना ही लोचनओं में उठने के लायक बनाती है

  2. कमियां बताने वाले ही सही मायने में अपने होते हैं
    गैरो को क्या पङी
    वो तो बातें बनाया करते हैं

  3. विकास जी आपकी लेखनी मे दम है
    मै समझ रहा हूँ हिन्दी लिखने मे कठिनाई होती है आप बिहार के हो इसलिए..
    पर आगे बढ़ने पर सुनना तो पढ़ता है उसका बुरा मत मानिए बल्कि सुधार लाइये ताकि कोई टोंक ना पाए..
    कविता लेखन मे आपका रोई सानी नही है.
    बस वर्तनी थोड़ा पर कोई बात नही हम भाव समझते है..

    1. “बिहार के हैं इसलिए वर्तनी में अशुद्धि है”,
      कहना न्यायसंगत नहीं ।
      वैसे अभिव्यक्ति पे पाबंदी भी नहीं ।

  4. विकास जी। गलती में ही सही का निवास है।आप गलती पे गलती करते रहे। एक न एक दिन अवश्य ही गलती पे सही भारी पड़ने लगेगा।

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