राह में रोड़े

ए दोस्त सोचो,अगर राह में रोड़े न होते।
जीवन के परिभाषा, हम कैसे समझ पाते।।
यही रोड़े सभी को जीवन धारा बदल दिया।
वरना संसार के इस सैलाब में हम कहाँ होते।।
ठोकर पे ठोकर खा के भी हम कब संभल पाए।
काश हम दुनिया को राह के रोड़े से तौल पाते।।

Comments

8 responses to “राह में रोड़े”

  1. Suman Kumari

    सिखा तो ठोकर लगाने वाले रोङे भी जाते हैं
    बशर्ते हसरत हमारी सीखने की हो

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

  2. बहुत खूब, अति सुन्दर,

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद पांडे जी।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया सर।

  3. Geeta kumari

    राह के रोड़े ने बहुत कुछ सिखा दिया,
    ज़िन्दगी की राहें आसां नहीं ,ये दिखा दिया।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद गीता जी।

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