आज बहुत उदास है दिल ये मेरा

आज बहुत उदास है दिल ये मेरा
जब से तुम मेरे सामने से आकर गए
लगता है कुछ छिन-सा गया है मेरा
भूला तो दिया था मैंने कब का तुझे
पर आज लगा जैसे गलत थी मैं
तुम्हारी धूप पड़ते ही क्यों
धुंधला गया जहान
सांसे क्यों थम गईं
रुक गया क्यों समा
तुम आस-पास मेरे आया ना करो
बड़ी मुश्किल से निकल पाई हूं सदमें से तेरे…

Comments

15 responses to “आज बहुत उदास है दिल ये मेरा”

  1. Priya Choudhary

    बिरहा की एक सुंदर झलक nice poem 👏👏

  2. Geeta kumari

    विरह वेदना की बहुत सुंदर रचना।

  3. सुंदर रचना

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. शुक्रिया आपका

    2. शुक्रिया आपका

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. शुक्रिया आपका

  6. विरह भावना का बहुत सुंदर चित्रण

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