ए चाहत

एक दिन दिल ने जब कहा ,
वहाँ दग़ाबाज़ों का बसेरा है।
नादान चाहत से तब मैं कहा ,
संभल वहाँ जरूर कोई सपेरा है।।

Comments

5 responses to “ए चाहत”

  1. Geeta kumari

    वाह, बहुत सुंदर

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