9 Comments

    1. शुक्रिया बहिन
      ये कोई कविता नहीं
      मैंने अपनी मन के भावों को यथावत लिपिबद्ध कर दिया।
      इसमें कविता का कोई लक्षण देखे तो ये भी गुरदेव की कृपा होगी।

  1. सम्मान हैं
    देश की जान हैं।
    आम नहीं खास नहीं
    राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक।
    वाह वाह, आपकी ये पंक्तियां उच्चकोटि की हैं शास्त्री जी, आपकी लेखनी को प्रणाम।

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