गुरुवर के प्रति

मान हैं
सम्मान हैं
देश की जान हैं।
आम नहीं खास नहीं
राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक।
नाक से नेटा टपक रहा था।
आंसू का कतरा लुढक रहा था।
बाहुपाश में भरकर जिसने अपनाया
वो मेरे भाग्यविधाता हैं वही ज्ञान के दाता हैं।।
ऐसे शिक्षक गुरुगरीष्ट को वन्दन है बारम्बार।
भूलोक से स्वर्गलोक तक खुशियाँ मिले अपार।।
गुरुवर आपके चरणों में कोटि-कोटि नमस्कार ।।

Comments

9 responses to “गुरुवर के प्रति”

  1. Geeta kumari

    वाह, भाई जी बहुत सुंदर कविता है। आपका कविता लिखने के अनूठे तरीके को प्रणाम। 🙏

    1. शुक्रिया बहिन
      ये कोई कविता नहीं
      मैंने अपनी मन के भावों को यथावत लिपिबद्ध कर दिया।
      इसमें कविता का कोई लक्षण देखे तो ये भी गुरदेव की कृपा होगी।

      1. Geeta kumari

        जी,🙂 भाई जी

  2. Anjali Gupta Avatar

    सुंदर कविता

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    शिक्षक के प्रति सम्मान भाव दिखाती सुंदर पंक्तियां

  4. सम्मान हैं
    देश की जान हैं।
    आम नहीं खास नहीं
    राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक।
    वाह वाह, आपकी ये पंक्तियां उच्चकोटि की हैं शास्त्री जी, आपकी लेखनी को प्रणाम।

  5. अतिसुंदर भाव

  6. प्रशंसनीय

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