वजह हुआ करती है..

‘वजह हुआ करती है नज़रों के झुक जाने में,
बेबाक आँखों में शर्मिन्दगी का सलीका नही होता..
वो तोड़ सकते हैं मेरे यकीं को किसी भी वक्त मगर,
बेरुखी जताने का ये आखिरी तरीका नही होता..’

– प्रयाग

Comments

18 responses to “वजह हुआ करती है..”

  1. वो तोड़ सकते हैं मेरे यकीं को किसी भी वक्त मगर,
    एक श्रेष्ठ कवि की श्रेष्ठ रचना

    1. बहुत बहुत आभार आपका

  2. Geeta kumari

    बेहद शानदार रचना ।

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  3. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. प्रोत्साहन के लिए आपका आभार

    1. बहुत शुक्रिया आपका

    1. धन्यवाद जी

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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