पुरानी सी डायरी के फ़टे पन्ने पर लिखी
अधूरी नज्म हूं मैं
जिसकी खूशबू बरकरार है अभी भी
कई मौसम गुजर जाने के बाद
अधूरी नज्म
Comments
8 responses to “अधूरी नज्म”
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क्या बात बहुत खूब अंजली
आती रहा करो आपके आने से सावन हरा-भरा प्रतीत होता है-

thanks
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बहुत ख़ूब
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thanks
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सुंदर
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thanks
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वाह वाह, भावपूर्ण रचना, काबिलेतारीफ
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thanks
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