यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ नकाब ही नकाब है।
यह कैसा मातम आज शायरो पे आया है।।
ना नज्म है ना ग़ज़ल है ना नातशरीफ है।
मौसम भी कुछ कुछ शायरों से ख़फा है।।
गुलशन में भी गुल खिलना भूल गया है ।
ए नकाब इतनी कयामत भी अच्छी नहीं है।।
यह क्या हो गया
Comments
6 responses to “यह क्या हो गया”
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सुन्दर प्रस्तुति
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बहुत खूब
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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Very nice😊👏👍
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अतिसुंदर रचना
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सुन्दर प्रस्तुति
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