आज भी आंखें सिर्फ उम्मीद के रंग ही तलाशती है,
क्या रंग नहीं देखे! इन आंखों से पूछो।
आज भी….
Comments
12 responses to “आज भी….”
-

अच्छी
-

धन्यवाद जी
-
-

दिल थाम के ही रह गया।
-

धन्यवाद
-
-
अतिसुंदर भाव
-

Thank you
-
-

Nice line
-

Thank you so much
-
-
हौसले के तरकश में
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो
हार जाओ चाहे जिन्दगी मे सब कुछ
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो!-

बहुत-बहुत धन्यवाद
-
-
बेहतरीन लेखनी
-

धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.