आज भी….

आज भी आंखें सिर्फ उम्मीद के रंग ही तलाशती है,
क्या रंग नहीं देखे! इन आंखों से पूछो।

Comments

12 responses to “आज भी….”

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

  1. Praduman Amit

    दिल थाम के ही रह गया।

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद

  2. Deep

    हौसले के तरकश में
    कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो
    हार जाओ चाहे जिन्दगी मे सब कुछ
    मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो!

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

  3. बेहतरीन लेखनी

Leave a Reply

New Report

Close