गफलत में कहीं खो न दें हम

गफलत में कहीं खो न दें हम
दोस्ती उनकी,
ए खुदा ऐसा न हो
इतनी सी है गुजारिश।
मौसम समझ न आया
थोड़ी हवा है चंचल
बाहर है धूप निकली
भीतर लगी है बारिश।

Comments

18 responses to “गफलत में कहीं खो न दें हम”

    1. सादर धन्यवाद जी

  1. Geeta kumari

    अति सुन्दर भाव

    1. आपको बहुत बहुत धन्यवाद

  2. This comment is currently unavailable

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  4. बहुत बढ़िया वाह

    1. सादर धन्यवाद

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