ख्वाइशों के पन्ने !!

बेजान है ये जिस्म मेरा
लफ्ज भी लड़खड़ा रहे हैं
भाव हैं बिखरे हुए
हम सिमट ना पा रहे हैं
ख्वाहिशों के पन्ने
भीगे हैं अश्कों से मेरे
बोलना बहुत कुछ चाहते हैं
पर कुछ भी कह ना पा रहे हैं !!

Comments

6 responses to “ख्वाइशों के पन्ने !!”

  1. बहुत ही मार्मिक तासे आपने अपने हृदय की वेदना को कविता में पिरोया है बेहद खूबसूरत कविता

  2. Geeta kumari

    हृदय स्पर्शी रचना .. बेहद खूबसूरत

  3. बहुत बहुत खूब

  4. बहुत अच्छी कविता

  5. Praduman Amit

    बहुत कुछ बयां कर गयी आपकी कविता।

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