कुछ छुपा कर रखी थी यादें,
कुछ सपने भी संजोए थे ।
हम सपनों के करीब जाकर,
कुछ पल सिमट कर सोए थे।
कुछ छुपा कर रखी थी यादें…
Comments
10 responses to “कुछ छुपा कर रखी थी यादें…”
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद जी
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वाह वाह
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धन्यवाद सर
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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बहुत हार्दिक आभार
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“जहाँ विश्वास हैं, वहीँ शक्ति हैं, वहीँ जित हैं ऑर वही आपके सपने पुरे होते हैं।”
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बहुत बहुत आभार
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बहुत उम्दा
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धन्यवाद
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