चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा
सजा मिल जाने पर,
बेगुनाह साबित होने से भी क्या फायदा ।
इज्जत की नाम अपने ही मासूमो की हत्या
साथ देने के बदले आरोप लगाते हैं मिथ्या
मानवता के मूल्यों को खोने से क्या फायदा ।
जो दिखता है वैसा, अकसर होता नहीं
दूजो के लिए अपनों को ऐसे खोता नहीं
मृगतृष्णा के पीछे भागने से क्या फायदा ।
मृगमरीचिका
Comments
4 responses to “मृगमरीचिका”
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बात बिल्कुल सही है
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यथार्थ पर आधारित सच्चे भाव हैं। “चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा” में आनुप्रासिक अलंकरण है। वाह
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सुंदर
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सुन्दर प्रस्तुति
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