फांसी, एनकाउन्टर जैसी किसी भी सजा का
नौनिहालो को न रहा है अब डर
जब हो गया हो पतन नैतिक मूल्यों का
फिर कैसे हो आदर्शों का असर।
पतन
Comments
9 responses to “पतन”
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100% सत्य
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ग
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प्रखर कविता
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बहुत बहुत धन्यवाद
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यथार्थ
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सादर आभार
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बहुत बहुत धन्यवाद
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कटु सत्य
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