पतन

फांसी, एनकाउन्टर जैसी किसी भी सजा का
नौनिहालो को न रहा है अब डर
जब हो गया हो पतन नैतिक मूल्यों का
फिर कैसे हो आदर्शों का असर।

Comments

9 responses to “पतन”

  1. प्रखर कविता

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  2. This comment is currently unavailable

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

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