10 Comments

  1. वाह, टूटे हुए दिल को भी तोड़ने की गहरी संवेदना व्यक्त हुई है।
    “तुमने भी मुंह मोड़कर मुझे
    मुंह के बल गिरा दिया।।” में कविता को अनुप्रास से अलंकृत किया गया है। सुन्दर कविता

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