हिंदी गंगाजल है ।।

रोम-रोम में बसी हमारे
हिंदी राजभाषा है
बन जाए यह राष्ट्रभाषा
इस जीवन की यह आशा है
हिंदी है परिपक्व, परिपूर्ण
हिंदी ही ममता-सी निर्मल है
हिंदी है लहू में अपने
हिंदी ही कण-कण में मिश्रित है
हिंदी मां के आंचल में है
हिंदी ही गंगाजल है
हिंदी है कवि के मन की पीड़ा
हिंदी ही शब्द-सागर है
हिंदी है संस्कृत की बेटी
हिंदी ही प्रज्ञा की जननी है
हिंदी है सबसे सरल, मनोरम
हिंदी ही उर्दू की भगिनी है।।

Comments

10 responses to “हिंदी गंगाजल है ।।”

  1. Satish Pandey

    मातृभाषा हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालती बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।

  2. जय हिंद जय हिन्दी

  3. Geeta kumari

    हिंदी भाषा पर बहुत सुंदर प्रस्तुति

  4. This comment is currently unavailable

  5. बहुत सुंदर पंक्तियां 👏👌

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

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