अज़ल से हमारे हो

आज से नहीं तुम
अज़ल से हमारे हो,
गैहान जब से
बना होगा तब से,
दिल मे हमारे हो
गजल में हमारे हो।

अज़ल – अनादिकाल
गैहान – सृष्टि

Comments

14 responses to “अज़ल से हमारे हो”

    1. Satish Pandey

      Thank you

  1. बहुत सुन्दर

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    वाह, सतीश सर बहुत ख़ूब।
    आपकी रचनाओं का तो कोई जवाब ही नहीं है, सब की सब लाजवाब ।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद गीता जी, आपके द्वारा निरंतर किया गया उत्साहवर्धन सचमुच प्रशंसनीय है। सादर अभिवादन

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

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