अपनी आंखों में
दया भाव रखो
मदद करो गरीबों की
उनकी सेवा में खपो।
मिलेगा सुख स्वयं के भीतर से
कभी हरि नाम जपो,
मदद में लगो।
दया भाव रखो
Comments
16 responses to “दया भाव रखो”
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वाह क्या बात है, बहुत बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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वाह, क्या ख़ूब लिखा है।बहुत सुंदर भाव। प्रत्येक भाव को बहुत ही सलीके से लिखते है सर, इस विलक्षण प्रतिभा को सलाम ।
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आपके द्वारा की गई इस सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक अभिवादन करता हूँ। आपने भाव को ग्रहण कर समीक्षा दी, सादर धन्यवाद, गीता जी
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बहुत खूब, wow
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Thanks जी
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Very nice
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Thank you ji
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अतिसुंदर
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बहुत आभार जी
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जय हो गजब, too good
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बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
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बहुत सुंदर भाव
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सादर धन्यवाद जी
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