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  1. मेहनत कश की करुण कथा का समसामयिक और सटीक चित्रण
    “काल का ग्रास ना बना तो लौट आऊंगा इन गलियों में, बुढ़ापा काट लूंगा।”.. हृदय स्पर्शी पंक्तियां हैं । बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण । काबिले तारीफ़ ।

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